योगासनों का महत्व हमारे जीवन में

योगासनों का महत्व- योगासन अंदर के शरीर को स्वस्थ रखने की क्रियाएं हैं। जो शरीर बाहर से दिखाई देता है, शरीर-रचना के प्रकरण में उसके बारे में आपको थोड़ी-सी जानकारी दी गयी है | वहीं संक्षेप में यह भी समझाया गया था कि यह शरीर भीतर से किस प्रकार कार्य करता है। स्वस्थ रहने का अर्थ ही है कि वह ठीक प्रकार से काम करें। इस प्रकार जब हमारा अंदर का शरीर स्वस्थ न होगा, उसका कार्य ठीक न होगा, तो हम स्वस्थ नहीं कर सकते।

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क्या आप जानते हैं कि हृदय को 24 घंटे काम करना पड़ता है? उसे एक क्षण का भी आराम नहीं? हृदय को आराम तभी मिल सकता है, जब रक्त को ले जाने और विकार सहित वापस लाने वाले मार्ग बिल्कुल साफ हों। थोड़ी-सी रुकावट भी रोग का कारण बन सकती है । हमारे फेफड़े पूरी तरह काम करें और अधिक-से – अधिक ऑक्सीजन वायु ग्रहण कर रक्त को शुद्ध कर सकें; भोजन को पचाने के लिए आमाशय, यकृत, क्लोम तथा अन्य ग्रंथियां अपने पूरे रस दें, ताकि पाचन क्रिया सुचारुरूप से हो; अंतड़ियां भोजन में से पूरे तत्व निकालें; रस, रक्त, मांस, मज्जा, हड्डी, वीर्य इत्यादि शरीर की आवश्यकतानुसार बने तभी शरीर भीतर और बाहर से स्वस्थ तथा निरोग हो सकता है।

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स्वास्थ्य ही प्रसन्‍नता है- योगासनों का महत्व

“हमारा नाड़ी-संस्थान पुष्ट हो ताकि शरीर के हर कार्य का संचालन सुचारु रूप से हो | विकार अंदर रुकने न पाएं, हमारी पकड़ बढ़ जाए। शरीर के अंदर होने वाले हर कार्य की सूचना हमें तुरंत मिले । शरीर सब कुछ बताता है, हमें भूख लगती है, खाते हैं; प्यास लगती है, पानी पीते हैं; थकते हैं, तो आराम करते हैं, नींद आती है ।शरीर जब भोजन ग्रहण नहीं करना चाहता, तो वमन होता है। शरीर किसी विकार को सहन नहीं करता। केवल उसकी ओर ध्यान देने की आवश्यकता है, उसकी आवाज को सुनना है, उसे क्रियाशील करना है।

जब हम उसकी ओर ध्यान नहीं देते, तब विकार रोग का रूप धारण करता है और लय भागते हैं दवाइयों की ओर | दवाई क्या करती है? वह रोग की सूचना देंने वाले नाड़ी सूत्रों को सुला देती है, जिससे रोग का प्रभाव दब जाता है और हम मान लेते हैं कि हम स्वस्थ हो गये | योगासनों का विशेष प्रभाव स्नायुमंडल पर पड़ता है।

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स्नायुमंडल –जिसका नियंत्रण मस्तिष्क द्वारा होता है — जितना शिथिल व शक्तिशाली होगा, उतना आपका मन स्वस्थ होगा। आपकी कार्यक्षमता बढ़ जाएगी और आपका हर कार्य पूरी एकाग्रता से होगा। मानसिक शक्ति के बढ़ जाने से आप अपने कार्य को सुचारु रूप से करने लग जाएंगे। आपके सोचने-विचारने का ढंग ही बदल जाएगा। सकारात्मक सोचने की प्रवत्ति पैदा होगी, जिससे आपका हर कार्य कुशलतापूर्वक सम्पन्न होगा। आप उचित व ठीक निर्णय करने की स्थिति में आ जाएंगे।

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गृहस्थी का जीवन समस्याओं से भरा है। जीवन भी एक चुनौती है और चुनौती का सामना करना हमारा धर्म व कर्तव्य है । हर पल समस्याएं हमारे समाने खड़ीं हैं, कभी अर्थ की समस्या, कभी बच्चों को समस्या, कभी राशन की समस्या, कभी काम की समस्या और कभी रोगों की समस्या आदि | इन समस्याओं का हल शांत मन व स्वस्थ शरीर से ही निकल सकता है ।

जब हमारा शरीर स्वस्थ होगा, मन शांत होगा, तो हम अपनी समस्याओं का हल स्वयं निकाल लेंगे, हममें निडरता आएगी, हमें भय नहीं सताएगा। यह आप अपने रोज के जीवन में देखते हैं कि जब आपका कोई काम ठीक हो जाता है, आपकी समस्या हल हो जाती है, तो आप अपने-आपको हल्का व प्रसन्‍न अनुभव करते हैं। जब आपके कार्य ठीक ढंग होने लग जाएंगे, तो आपकी प्रसन्नता में स्थिरता आयेगी।

जब कभी कोई काम बिगड़ जाएगा, किसी काम का परिणाम ठीक नहीं निकलेगा, तो भी आप शांत रहेंगे और आपको संतोष रहेगा कि ‘ अपनी ओर से पूरा प्रयास किया था ,आपका आत्मविश्वास डिगेगा नहों । जब आत्मविश्वास, संतोष और प्रसन्नता बनी रहेगी, तब वह आनद का रूप ले लेगी यहीं आनंद परमात्मा है और यही योग है।

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स्वास्थ्य के लिए व्यायाम जरूरी- Yoga Ka Mahatva

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि व्यायाम न करने से शरीर की मांसपेशियों, नसों तथा अन्य भागों में एक प्रकार की मैल, खड़िया मिट॒टी-सी जम जाती है जिसमें लाइमफास्फेट, मैग्नेशिया आदि पदार्थ होते हैं। मनुष्य शरीर के लिए यह मैल विषतुल्य होती है। आयु के अनुपात से यह मैल बढ़ती है और शरीर के यंत्रों को बिगाड़ देती है।

इस मैल के जमने से नसें व रक्त नलिकाएं मोटी होकर सिकुड़ जाती हैं, मस्तिष्क का रक्त संचार धीमा हो जाता है, स्मरण शक्ति क्षीण हो जाती है और भ्रम, चिंता, चिड़चिड़ापन आदि विकार उत्पन हो जाते हैं | व्यायाम द्वारा इस मल को साफ रखकर ही हम शारीरिक और मानपिक स्वास्थ्य तथा लंबी आयु प्राप्त कर सकते हैं।

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शरीर में इन विजातीय द्रव्यों की मात्रा बढ़ने से निर्जीविता व निर्बलता बढ़ने लगती है। योगासन करने से ये विकार दूर हो जाते हैं, शरीर स्वस्थ होता है, अंतड़ियाँ पर योग की क्रियाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे पेट की अपच, गैस, कब्ज, सड़न आदि रोग नष्ट हो जाते हैं । योगासन करने से चेहरे पर कांति, शरीर में बल, मन में उत्साह और बुद्धि में शक्ति का विकास होता है | यौगिक क्रियाओं द्वारा चित्तवृत्तियों का निरोध होकर समाधि की प्राप्ति होती है । यह स्थिति मानव जीवन की अनोखी सिद्धि है। समस्याओं से घिरा मानव इस स्थिति को प्राप्तकर सुख व शांति का अनुभव करता है| इसमें उसके सभी दुःख सदा के लिए दूर हो जाते हैं।

योगासनों का महत्व हमारे जीवन में

योगासन ही क्‍यों?

कई व्यक्ति प्रश्न करते हैं कि अन्य व्यायाम, जैसे — सैर, दंड-बैठक, मुगदर घुमाना मल्ल-युद्ध या फिर पश्चिमी देशों के खेलों आदि में क्या दोष है और योगासनों में ऐसी क्या विशेषता है, जो उसे ही जीवन का अंग बनाया जाए। नीचे दिये तथ्य अपने में प्रश्न के सभी उत्तरों को समेटे हुए है कि ‘ आखिर योगासन ही क्‍यों? योगासनों का महत्व

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1 . अन्य व्यायाम ‘ मुख्यतः: ‘ मांसपेशियों पर ही प्रभाव डालते हैं, जिससे बाहरी शरीर ही बलिप्ठ दिखाई देता है, इनसे अंदर काम करने वाले यंत्रों पर उतना प्रभाव नहीं पडता फलस्वरूप व्यक्ति अधिक देर तक स्वस्थ नहीं रह पाता, जबकि योगासनों से व्यक्ति की आयु लंबी होती है, विकारों को शरीर से बाहर करने की अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है और शरीर के सेल बनते अधिक व टूटते कम हैं।

2. अन्य व्यायाम व खेलों के लिए स्थान व साधनो की आवश्यकता पड़ती है । खेल तो साथियों के बिना खेले ही नहीं जा सकते हैं। जबकि योगासन अकेले ही दरी या चादर पर किये जा सकते है।

3. दूसरे व्यायामों का प्रभाव मन और इंद्रियों पर बहुत कम पड़ता है, जबकि योगासनों से मानशिक शक्ति बढ़ती है इन्द्रियों को वाश में करने की शक्ति आती है।

4. दूसरे व्यायामों में अधिक खुराक की आवश्यकता पड़ती है, जिसके लिए अधिक खर्च करना पड़ता है, जबकि योगासनों में बहुत कम भोजन की आवश्यकता होती है।

5. योगासनों से शरीर की रोगनाशक शक्ति का विकास होता है, जिससे शरीर किसी भी विजातीय द्रव्य को अंदर रुकने नहीं देता, तुरंत बाहर निकालने का प्रयत्न करता है, जिससे आप रोगमुक्त होते हैं।

6. योगासनों से शरीर में लचक पैदा होती है, जिसंसे व्यक्ति फुर्तीला रहता हैं, शरीर के हर अंग में रक्त का संचार ठीक होता है, अधिक आयु में भी व्यक्ति युवा लगता है. और उसमें काम करने की शक्ति बनी रहती है। अन्य व्यायामों से मांसपेशियों में कड़ापन आ जाता है, शरीर कठोर हो जाता है और बुढ़ापा जल्दी आता है।

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7. जिस प्रकार नाली की गंदगी को झाड़ लगाकर, पानी फैंककर साफ करते हैं, उसी प्रकार अलग- अलग आसनों से रक्त की नलिकाओं व कोशिकाओं को साफ करते हैं, ताकि उनमें रवानगी रहे और शरीर रोगमुक्त हो। यह केवल योगासन क्रियाओं से ही हो सकता है, अन्य व्यायामों से नहीं। अन्य व्यायामों से तो हृदय की गति ही तेज होती है, रक्त पूरी तरह से शुद्ध नहीं हो पाता।

8. फेफड़ों के द्वारा हमारे रक्त की शुद्धि होती है । योगासनों व प्राणायाम द्वारा हम अपने फेफड़ों के फैलने व सिकुड़ने की शक्ति को बढ़ाते हैं, जिससे अधिक-से-अधिक ओषजनक वायु फेफड़ों में भर सकें और रक्त की शुद्धि कर सकें । दूसरे व्यायामों में फेफड़े जल्दी-जल्दी श्वास लेते हैं, जिससे प्राणबायु फेफड़ों के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाती, जिसका परिणाम होता है विकार और विकार रोग का कारण हैं ।

9. वर्तमान समय में गलत रहन-सहन व अप्राकृतिक भोजन के कारण पाचन संस्थान के यंत्रों का कार्य स्चारुरूप से नहीं चल पाता। उन्हें क्रियाशील रखने में योगासन बहुत सहायक सिद्ध होते हैं, जबकि दूसरे व्यायामों से पाचन क्रिया बिगड़ जाती है।

10. मेरुदंड पर हमारा यौवन निर्भर करता है । सारा रक्त संचार व नाड़ी संचालन, इसी से होकर शरीर में फैलता है । जितनी लचक रीढ की हड्‌डी में रहेगी, उतना ही शरीर स्वस्थ होगा, आयु लंबी होगी, मानसिक संतुलन बना रहेगा ‘ यह केवल योगासनों से ही संभव हैं।

11: दूसरे व्यायामों से आपको थकावट आयेगी, बहुत अधिक शक्ति खर्च करनी पडेगी, जबकि योगासनों से शक्ति प्राप्त होगी । क्योंकि योगासन धीरे-धीरे और आराम से किये जाते हैं इसलिए इन्हें अहिंसक और शांतिप्रिय क्रियाएं कहा जाता है।

12. अन्य व्यायामों से मन॒ष्य के चरित्र पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता । जबकि योगासन स्वास्थ्य के साथ-साथ चरित्रवान भी बनाते हैं । यौगिक क्रियाओं से मानसिक व नैतिक शक्ति का विकास होता है, मन स्थिर रहता है । मन के स्थिर रहने से बुद्धि का विकास होता है । इन क्रियाओं में सत्वगुण की प्रधानता होती है, और सत्वगुण से मानसिक शक्ति का विकास होता है। ये लाभ केवल योगासन और प्राणायाम से ही प्राप्त हो सकते हैं।

13. हमारे शरीर में अनेक ग्रंथियां है, जो हमें स्वस्थ व निरोग रखने में महत्वपूर्ण कार्य करती हैं । इन ग्रंथियों का रस रक्त में मिल जाता है, जिससे मनुष्य स्वस्थ व शक्तिशाली बनता है। गले की पैराथाइराइड ग्रंथियों से निकलने वाले रस पर्याप्त मात्रा में न होने से बच्चों का पूर्ण विकास नहीं हो पाता और युवकों के असमय में ही बाल गिरने लगते हैं तथा शरीर में प्रसन्‍नता नहीं रहती । शरीर की विभिनन ग्रंथियों को सजग करके, पर्याप्त मात्रा में रस देने के योग्य बनाने के लिए योगासन पद्धति बड़ी कारगर है जबकि अन्य व्यायामों का प्रभाव इस दिशा में नगण्य है।

14. शरीर के रोगों को दूर करने में, प्राणायाम और षट्कर्म रामबाण का काम करते हैं। जब विजातीय द्र॒व्यों के बढ़ जाने से शरीर के अंग उन्हें बाहर निकाल पाने में समर्थ नहीं होते,तभी रोग का आरंभ होता है। विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालने के लिए इन क्रियाओ का सहारा लिया जा सकता है और अपने-आपको स्वस्थ तथा शक्तिशाली बनाया जा सकता है।

15. शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक विकास के लिए योग पद्धति सर्वोत्तम पद्धति है। इसका मुकाबला और कोई पद्धति नहीं कर सकती।

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योगासनों का महत्व हमारे जीवन में शरीर को लौकिक ऊर्जा से पुनर्भरण करते हैं और सुविधा प्रदान करते हैं:-

  • इसमें शरीर का पूर्ण संतुलन होता है और सदभाव की प्राप्ति होती है।
  • यह स्व-चिकित्सा को बढ़ावा देता है।
  • मन से नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बहार निकलने में मदद करता है।
  • शरीर की शक्ति को बढ़ाता है।
  • आत्म-जागरूकता बढ़ाता है।
  • बच्चों के लिए विशेष रूप से ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाता करता है।
  • पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करके शारीरिक शरीर में तनाव को कम करता है।

महाप्राण कायाकल्प और स्फूर्ति महसूस करता है। इस प्रकार, योग शरीर और मन को नियंत्रित करने के लिए हर आकांक्षी शक्तियों पर भरोसा करता है।

आपको योगासनों का महत्व के बारे में जानकारी अच्छी लगी होगी, हमें कमैंट्स करके बताये। “योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह योग की परंपरा 5000 साल पुरानी है। यह मन और शरीर की एकता का प्रतीक है।

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