त्रिकोणासन करने का तरीका और फायदे

त्रिकोणासन क्‍या है? | What is Trikonasana ?

इसमें शरीर की आकृति त्रिकोण के समान बनती है, अतः इसे ‘त्रिकोणासन‘ कहते हैं।

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त्रिकोणासन की विधि | Trikonasana Steps

त्रिकोणासन की विधि | Trikonasana Steps

सीधे खड़े होकर दोनों पांवों को दूर-दूर रखिये। यह दूरी कम-से-कम तीन फुट और ज्यादा-से-ज्यादा एक मीटर होनी चाहिये। इस आसन की अगली क्रिया में बायें हाथ को झुकाकर, बायें हाथ की एड़ी पर टिका लीजिये।

फिर दायें हाथ को आगे की ओर फैला लीजिये। इससे ऊपर का अंग सिर रहित कमर की सीध तक झुक जाता है। इस आसन की एक अन्य विधि और भी है, जिसमें घुटनों के बल बैठकर दोनों पांवों को इधर-उधर फैलाया जाता है।

योगाभ्यासी सीधा मुख रखे सामने की ओर देखता, और दोनों हाथों को जोड़े रहता है।

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त्रिकोणासन के लाभ | Trikonasana Benefits

  1. इस आसन को नियमित रूप से करने पर नितम्ब कस जाते हैं।
  2. स्त्री-पुरुषों के मुख की कान्ति भी बढ़ती है।
  3. पुरुषों के वीर्य-दोष भी दूर होते हैं और अधिक समय तक के लिये संभोग-शक्ति क्षमता बढ़ जाती है।
  4. रक्त संचालन में तीव्रता आती है तथा व्यक्ति खूब मन लगाकर कार्य करता है।

विशेष

युवा वर्ग के लिये त्रिकोणासन अत्यन्त उपयोगी है। इससे शरीर सुडौल बनता है।

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