सिंहासन योग विधि, लाभ और सावधानी

सिंहासन क्या है?

इस आसन को करते समय व्यक्ति के शरीर की मुद्रा सिंह के समान हो जाती है, अतः इस आसन को ‘सिंहासन‘ कहते हैं। यह आसन बहुत ही आरामदायक है जिसे कोई भी कर सकता है। वैसे यह एक अन्य आसनो जैसे नहीं है, इसके लाभ अन्य आसनों से बहुत अलग हैं। एक बार देखिये की सिंहासन के लाभ और विधि क्या है।

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सिंहासन के लाभ

  • इस आसन को करने से टॉन्सिल ठीक होते हैं।
  • कण्ठ, पिण्डली, घुटने व उंगलियों में सुडैलता और सुदढता आती है।
  • इस आसन से नाक, कान, गले आदि के रोग ठीक हो जाते हैं।
  • यह आंखों की जलन को ठीक करता है।
  • इस आसन से गर्दन की मांसपेशियों में आराम मिलता है।

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सिंहासन की विधि

सिंहासन की विधि

इस आसन को करने के लिये जमीन पर आसन लगाकर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जायें। दोनों हथेलियों के पंजों को शेर की भांति तानकर दोनों घुटनों पर रखें।

जीभ को बाहर निकालें, आंखों को शेर की आंखों की भांति फैलायें।  पूरक सांस खींचकर गले से निकालते हुए सिंह की भांति गुर्रियें।

सिंहासन की विधि | Simhasana

दूसरी विधि में भी पहले वाली स्थिति में बैठ जायें। दोनों हथेलियों को कमर के सामने की ओर झुकाये। गर्दन को इस प्रकार उठायें, जैसे शेर दहाड़ने के समय उठता है।

मुंह खोलकर जीभ को बाहर निकालें और उसे बाहर की ओर लटका लीजिये। सूर्य के प्रकाश को मुंह के अन्दर जाने दीजिये। आंखें बन्द करें। नाक से पूरक सांस लेकर आन्तरिक कुम्मक लगायें।

जितनी देर सांस रोक सकते हैं, रोकें! अन्त में गले से शेर के समान दहाड़ लगायें। इस आसन में गले के मध्य हृदय के बीच लगाना चाहिये।

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सिंहासन में विशेष

इस आसन का अभ्यास दूसरे आसनो की तरह ही सुबह जल्दी करना चाहिए। लेकिन अगर आप सुबह नहीं कर सकते हैं या फिर आपको इस समय कोई दूसरा काम हैं, तो यह आसन शाम को किया जा सकता है।

बस आप यह सुनिश्चित करें कि अपने भोजन और अपने अभ्यास के बीच कम से कम चार से छह घंटे का अंतर हो। इस आसन को करने पर आपका पेट और आंत खाली होनी चाहिए।

दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर बैठें । दोनों हाथों को घुटनों पर रखें।

इस आसन को करते समय जीभ यथा सम्भव बाहर निकालिये।

इस आसन को करते समय दहाड़ने में पूर्ण शक्ति से काम लेना होगा।

इस आसन को करते समय शरीर को तना हुआ रखना चाहिये।

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सिंहासन करने का समय

प्रारम्भ में इस आसन को एक या दो बार, बाद में 10 बार तक किया जा सकता है। आसन में कुम्भक के बीच थोड़ा रुक-रुककर विश्राम करें।

सिंहासन से पहले करें ये आसन

जो लोग पहले से योग का अभ्यास कर रहे है तो उनको सिंहासन योग करने में आसानी रहेगी। लेकिन फिर भी जो इस आसन का अभ्यास करना चाहता है उन्हें पहले ये आसन करने चाहिए।

  1. सुखासन
  2. सिद्धासन
  3. बालासन
  4. उष्ट्रासन
  5. वज्रासन

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