सन्तुलनासन की विधि और लाभ | Santolanasana Yoga

सन्तुलनासन क्या है? | Santolanasana Yoga

इस आसन से एक पांव की एड़ी पर पूरे शरीर का सन्तुलन बनाए रखा जाता है, अतः इसे सन्तुलनासन कहते हैं।

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सन्तुलनासन के लाभ | Santolanasana Benefits

  • इस आसन के अभ्यास से गुदा से गुप्तेन्द्रिय तक भीतरी अवयव पुष्ट होते हैं। वीर्य नलियों पर दबाव पड़ने के कारण अनैच्छिक वीर्यपात नहीं हो पाता।
  • इस आसन से स्वप्नदोष व प्रमेह आदि रोग दूर होते हैं।
  • इससे कामेन्द्रियों का आन्तरिक प्रवाह सक्रिय होता है।
  • संयमी जीवन के लिये यह आसन अत्यन्त लाभप्रद है।

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सन्तुलनासन करने की विधि | Santolanasana Steps

दायें पांव की एड़ी पर इस प्रकार बैठें कि वह गुदा तथा गुप्तांगों के मध्य भाग को दबाए रखें। पूर शरीर का भार पंजों पर विशेषकर सिरों पर डाले रखें। बायें पांव को दायीं जांघ के ऊपर इस प्रकार रखें कि वह घुटनों के समीप बना रहें।

इसके बाद स्वयं को संतुलित करें। आरम्भ में कठिनाई होने पर दीवार, कुर्सी आदि का सहारा भी लिया जा सकता हैं। अब हाथों को नितम्बों के ऊपर रखकर श्वास को जितनी देर तक रोक सकें, रोकें। फिर धीरे-धीरे श्वास लें तथा छोड़ें।

अपनी आंखों की ऊंचाई के बराबर स्थित किसी सफेद अथवा काले बिन्दु पर दृष्टि जमाए रखें। जब इस स्थिति में हों तो अपना ध्यान ईश्वर में लगाकर मन को।एकाग्र बनाए रखना चाहिए।

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विशेष

भारी शरीर वाले मनुष्य के लिए यह अभ्यास कुछ कठिन रहता है। वे अपने पीछे अथवा अगल-बगल झूलने लगते हैं, परन्तु नियमित अभ्यास से कुछ दिनों बाद उन्हें भी सफलता मिल सकती है।

यह आसन स्त्रीउपयोगी नहीं है। केवल पुरुषों के लिए हैं। अतः स्त्रियां इस आसन को न करें।

सन्तुलन बनाए रखने में चाहे कई दिन लग जांएं पर आसन का अभ्यास करते रहें।

सन्तुलनासन करने का समय

आसन मुद्रा अपनाने के बाद उसमें एक मिनट तक रहें, तीन बार इसे दोहरायें।

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