काली मिर्च के फायदे

काली मिर्च का कुछ रोगो के लिए उपचार बताये जा रहे है। ये उपाय बहुत गुणकारी साबित हुए है। काली मिर्च का स्वाद अच्छा नहीं होने बावजूद भी ये स्वस्थ्य गुणों से भरपूर है।

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काली मिर्च के फायदे | kali mirch khane ke fayde

गले के लिए

सर्दी लगने, चीखने चिल्लाने या देर तक ज़ोर से गाने या संक्रमण (इन्फेक्शन) के असर से गला बैठ जाता है, आवाज़ धीमी पड़ जाती है । सोते समय दो छोटे बताशे और 5-6 काली मिर्च चबा कर खाएं और पानी पिये बिना सो जाएं । सुबह तक आराम हो जाएगा।

नेत्र ज्योति के लिए

प्रातः खाली पेट आधा चम्मच पिसी काली मिर्च, आधा चम्मच पिसी मिश्री और एक चम्मच मख्खन या शुद्ध घी मिला कर चाट लें। ऊपर से दूध या चाय पी सकते हैं। इस प्रयोग से नेत्र ज्योति बढ़ती है।

पाचन शक्ति के लिए

जीरा, सोंठ चूर्ण, काली मिर्च और सेन्धा नमक- सब 40-0 ग्राम लेकर कूट पीस कर मिला लें। इस चूर्ण को एक चम्मच भोजन के बाद थोड़े से पानी के साथ लेने से पाचन शक्ति बढ़ती है।

सर्दी बुखार

काली मिर्च 5 नग, तुलसी के पत्ते 10-11, लौंग 2 नग, ज़रा सा अदरक और एक छोटी इलायची के दाने। सबको कूट कुचल कर एक गिलास पानी में डाल कर उबालें । जब रंग आने लगे तो एक चम्मच शक्कर और थोड़ा दूध डाल कर उतार लें। छान कर गुनगुना गरम पिला कर ढक कर सुला दें। सुबह तक पसीना आएगा और सर्दी व बुखार से छुटकारा मिल चुका होगा।

गठिया दर्द के लिए

आधा लिटर सरसों के तैल में 00 ग्राम पिसी काली मिर्च डाल कर उबालें । जब तैल आधा रह जाए तब उतार कर ठण्डा कर लें और आधा चम्मच पिसा सेन्धा नमक व एक डली कपूर की डाल दें । खूब हिला मिला कर छान लें सोने से पहले दर्द के स्थान पर यह तैल लगा कर हलके से मालिश करें। कुछ दिनों में दर्द जाता रहेगा।

खांसी का ईलाज

खांसी को 2-3 दिन में दूर करने वाला एक घरेलू देहाती नुस्खा लिख कर बता रहा हूं । बहुत गुणकारी नुस्खा है।

नुस्खा- देहातों में एक पौँधा बहुतायत से पाया जाता है जिसे संस्कृत में कण्टकारी, हिन्दी में भटकटैया, अन्य भाषाओं में भुई रिंगणी, भोया रिंगणी, कण्टिकारी, छोटी कटेरी आदि कहते हैं । इस पौधे की जड़ को सिल बट्टे पर 10 काली मिर्च के साथ पीस कर छान लें। इसे दो चम्मच (बड़े) मात्रा में सुबह खाली पेट और दो चम्मच (बड़े) शाम को 6-7 बजे तीन दिन तक पिएं। खांसी चलना बन्द हो जाएगा।

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