जानें हलासन की विधि, लाभ और सावधानी

हलासन में मुद्रा हल के जैसे होती है। हल का उपयोग खेत को जोतने के लिए किया जाता है। और हल सख्त से सख्त ज़मीन को उपजाऊ और मुलायम बनता है ठीक वैसे ही इस योग से शरीर में लचीलापन बढ़ता है। ये आसन उनके लिए बहुत ही उपयोगी है जो लगातार ऑफिस में बैठकर काम करते हैऔर जिसके कारण उनकी रीढ़ की हड्डी में दर्द होता है।

ये भी पढ़े:- गोरक्षासन विधि और लाभ

हलासन क्या है? | What is Halasana ?

इस आसन में शरीर की स्थिति हल-बैलों की सहायता से (खेत जोतने वाला यंत्र) की सी होती है। अतः इसे हलासन कहते हैं। हलासन में दोनों बांहें सिर की सीध में होती हैं। स्थिति हल की ही सी बनती है। हलासन योग का नाम खेत में उपयोगी उपकरण हल से लिया गया है। इससे शरीर एक्टिव होता है और शक्तियों को सक्रिय करता है।

ये भी पढ़े:-हंसासन योग की विधि और फायदे

हलासन के लाभ | Halasana Benefits

हलासन यौन ग्रंथियों के सभी दोषों को दूर कर उन्हें सशक्त और पुष्ट बनाता है। इससे काम शीतल, कामशक्ति की कमी व नपुंसकता से सम्बन्धित विकृतियां दूर होती हैं।

यह मेरूदण्ड को लचीला बनाकर शरीर के आवश्यक वजन को घटाता है। कमर की चौड़ाई को कम करके मोटापे को घटाता है।

यह आसन स्नायु एवं पाचक संस्थान को शक्ति प्रदान कर शरीर को सुडौल बनाता है।

इस आसन से रीढ़ के प्रत्येक भाग का व्यायाम हो जाता है। इसके कारण शरीर में रक्त-संचार तीव्रता से होता है और वह शरीर के ऊपरी भागों में विशेष रूप से एकत्र होता है।

इससे मुखमण्डल कांतिपूर्ण बनता है तथा युवावस्था की वृद्धि होती है।

पेट, फेफड़ों व छाती के अनेक रोगों का निदान इस आसन से हो जाता है। रक्त संचरण को नियमित बनाता, चर्बी को हटाता व क्रोध को घटाता है। इससे मधुमेह रोग समूल नष्ट हो जाता है।

ये भी पढ़े:-अर्ध चक्रासन योग विधि, लाभ और सावधानी

हलासन करने की विधि | Halasana Step

इस आसन को कैसे करे। इसको करने की दो तरह की विधि है आइये जानते है दोनों प्रकार की विधि-

हलासन की विधि -1

Halasana Step in Hindi

पीठ के बल लेटकर पूरे शरीर को एकदम सीधा फैला दें। दोनों एड़ियों तथा पैर के अंगूठे परस्पर सटे रहें। हथेलियों को शरीर के समक्ष, बगलों के समीप भूमि पर रखें।

गर्दन तथा सिर को सीधा कर लें। फिर दोनों पांवों को फैलाकर कड़ा करें। सांस रोकें। दोनों पांवों को एक साथ तब तक ऊपर की ओर उठायें जब तक कि वे लम्बरूप स्थिति में न आ जाएं।

दोनों हथेलियों को भूमि पर यथास्थान बनाकर रखें। जब आप उस स्थिति में पहुंच जाएं तब सांस छोड़ने के साथ पांवों को सिर की ओर झुकाना आरम्भ कर दें तथा उनके द्वारा सिर के आगे पृथ्वी को इसी दूरी पर छूने का प्रयत्न करें।

जहां तक पांव के अंगूठों के लिए छूना सम्भव हो सके, इस स्थिति में जहां तक जा सकते हो जाएं, फिर जहां टिक सकते हो टिककर स्वयं को स्थिर करें।

श्वास छोड़ने की क्रिया समाप्त हो जाए तब तक स्वाभाविक रूप से श्वास लेते और छोड़ते रहें। आसन सम्पूर्ण होने तक यह क्रिया करें।

ये भी पढ़े:-वृश्चिकासन की विधि और लाभ

हलासन की विधि-2

Halasana Step 2 in hindi

इस आसन को करने के लिए धरती पर पीठ के बल लेटकर पूरे शरीर को सीधा कर दें। दोनों एड़ियां तथा पैर के अंगूठे परस्पर सटे रहें। दोनों हथेलियों को बगल के समीप भूमि पर रखें। गर्दन तथा सिर को सीधा कर लें।

अब १वास खींचते हुए दोनों हाथों को समानान्तर रखते हुए ऊपर की ओर उठाते हुए सिर को सामने लाएं तथा हथेली के पृष्ठ भाग को भूमि के समानान्तर रख दें।

श्वास लेने तथा हाथ उठाने की क्रिया एक साथ समान करें तथा हाथों द्वारा है का स्पर्श होने तक श्वास लेने की क्रिया जारी रखें। जब हाथ पृथ्वी को स्पर्श कर उठे श्वास छोड़नी वाहिए।

इसके तुरन्त बाद सांस लेना तथा दोनों पांव को उठाना आरम्भ करें तथा श्वास छोड़ते हुए उन्हें एकदम सीधा आकाश की ओर उठा दें। जब पांव पूरी तरह ऊपर उठ जाएं तब १वास छोड़ना आरम्भ करें तथा उसके साथ ही पांव को सिर के सामने पृथ्वी की ओर तथा सात-आठ सेकेण्ड इस अवस्था में रहकर आसन आरम्भ करने से पूर्व की स्थिति में लौटकर आ जाएं।

ये भी पढ़े:-सूर्य नमस्कार के 12 चरण | Surya Namaskar Pose and Benefits

हलासन विधि करने का समय

आसन की स्थिति बना लेने पर आठ से दस सेकण्ड तक रहें। इस आसन को 10 सेकेण्ड से ज्यादा न करें। एक से बढ़ाकर त्तीन बार तक करें।

हलासन में सावधानी | Halasana Precautions

दस्त, सिरदर्द, हाई बीपी, माहवारी या गर्दन में चोट होने पर हलासन से बचना चाहिए।

इसका अभ्यास सावधानी से और हो सके तो योग प्रशिक्षक के दिशा निर्देशन में करे।

अपनी क्षमता के अनुसार ही करे अधिक जोर न लगायें।

ये भी पढ़े:-उत्तानपादासन की विधि और फायदे | Uttanpad Aasan

हलासन से पूर्व ये आसन करें

हलासन योग से पूर्व इन आसनो को करना चाहिए जिससे आसन करने में आसानी रहे।

बालासन (Balasana)
सेतुबंधासन (Setu Bandahasana)
वीरासन (Virasana)
सर्वांगासन (Savangasana)

हलासन योग के बाद करने वाले आसन

कर्नापीड़ासन (Karnapidasana)
ऊर्ध्व पद्मासन (Urdhva Padmasana)
पिण्डासन (Pindasana)
मत्स्यासन (Matsyasana)
उत्तान पादासन (Uttana Padasana)
शीर्षासन (Sirsasana)

ये भी पढ़े:-उष्ट्रासन | Ustrasana Benefits in Hindi

सारांश

इस लेख में आपको बताया हलासन योग कैसे करते है और इस आसन में किस प्रकार की सावधानी रखनी चाइए। थोड़े अभ्यास के साथ इस आसन को कर सकते है।

इस आसन में कुछ अभ्यासी हाथों को बांधकर सिर का घेरा बनाते हैं तथा कुछ लोग हाथों से पंजों की संधि को थाम लेना ही पूर्णावस्था मानते हैं।

हलासन विधि में आठ से दस सेकण्ड तक ही रहें। पांव के घुटने मुड़ें नहीं। शरीर के सभी अंगों को तना हुआ रखें। दोनों हथेलियों को भूमि पर रखते समय बांहें भी तनी और स्थिर रहनी चाहिएं।

ये भी पढ़े

धनुरासन कैसे करें | Dhanurasana in Hindi | Benefits

वज्रासन योग के लाभ और विधि | Vajrasana

Add Comment