गर्भासन कैसे करें | Garbhasana

गर्भासन कैसे करें । Garbhasana in Hindi इस लेख में गर्भासन को करने का तरीका, इनसे होने वाले लाभ और इस आसन को करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए बताया गया है।

गर्भासन नाम संस्कृत भाषा से आता है। जहाँ ‘गर्भ’ का मतलब भ्रूण है और आसन का अर्थ योग मुद्रा है। जब आप इस आसन को करते हैं, तो आपका शरीर एक भ्रूण के आकार जैसा दिखाई देने लगता है। इसलिए इस आसन को यह नाम दिया गया है। मां के गर्भ में एक बच्चा सभी चिंताओं से मुक्त होता है और मन शांत होता है। इसलिए इस आसन के दौरान, व्यक्ति केवल वही सोचता है जो मानसिक शांति दे सके।

गर्भासन एक आसन होने के साथ-साथ योग मुद्रा को संतुलित करता है, इस मुद्रा में आपको अपने शरीर के वजन को नितंबों पर संतुलित करना होता है। गर्भासन के लाभों पर चर्चा करने से पहले, आइए जानते हैं कि गर्भासन कैसे करें

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गर्भासन योग क्या है? | Garbhasana in Hindi

गर्भ का मतलब होता है कोख। इस आसन में व्यक्ति के शरीर की मुद्रा गर्भ में शिशु के समान होती है, अतः इस आसन को “गर्भासन” कहते हैं। यह आसन स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभकारी है मुख्यतया ये स्त्रियों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। गर्भासन शरीर में ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करता है और इसलिए इसे योग में शामिल किया जाना चाहिए है।

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गर्भासन करने की विधि | Garbhasana Steps

इस आसन को करने का सरलतम तरीका यहाँ बताया गया है। आसान को करने की विधि का अनुसरण कर आप इसे कर सकते है।

  • आसन लगाकर उस पर बैठकर दोनों टांगों को सामने की ओर फैला लें। अब पद्मासन की मुद्रा में आयें।
  • इसके बाद कुक्कुटासन की भांति दोनों हाथों को टांगो एवं जांघों के मोड़ के बीच से निकालें। धीरे-धीरे कुहनियों को अन्दर और जांघों को मोड़कर ऊपर करें।
  • जब दोनों कोहनी बाहर निकल जायें, तो दोनों गालों पर हाथों को रखकर संलग्न चित्रानुसार बैठ जायें और स्वाभाविक रूप से सांस लेते रहें।
  • कुछ समय इसी अवस्था में रुके रहने के बाद पूर्व अवस्था में आकर शरीर को विश्राम करायें तथा विश्राम के पश्चात्‌ क्रिया दुहराई जा सकती है।

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गर्भासन के रोग निदान और लाभ | Garbhasana Benefits in Hindi

गर्भासन के कुछ महत्वपूर्ण लाभ इस प्रकार है की –

  • इस आसन को करने से बांह, हाथ, हाथ के पंजे, जांघ, टांग, घुटनो, टखनों, पैरों के पंजे, कमर, पीठ आदि का सम्पूर्ण व्यायाम होता है।
  • शरीर के जोड़ मजबूत एवं लचीले होते हैं।
  • इससे शरीर में चेतना, स्फूर्ति, उल्लास, बल आदि की वृद्धि होती है।
  • इस आसन में पद्मासन के सभी लाभ मिलते हैं।
  • यह आसन वात तथा कफ प्रधान प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए विशेष उपयोगी है।
  • जोड़ों के दर्द, गठिया आदि में भी लाभकारी है।
  • इसके अभ्यास से शरीर में लचक बढ़ती है और शरीर पुष्ट व सुंदर बनता है।
  • इससे इंद्रियों व मन पर नियंत्रण करने में सहायता मिलती है। स्त्रियों के लिए यह सर्वोत्तम आसन है।

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विशेष

इस आसन में पद्मासन की मुद्रा बनाकर दोनों हाथों को टांगों के बीच में से निकालकर गालों को स्पर्श करते हैं। हाथों को जांघों, टांगो के बीच में से निकालते समय पूण सावधानी बरतनी चाहिये। अभ्यास सदैव धीरे-धीरे करना चाहिये।

आसन करते समय मुंह पूर्व की ओर रखना चाहिये। आंसन तभी तक लगाना चाहिये, जब तक कि अतिरिक्त थकान का अनुभव न होने लगे। इस आसन से पहले पद्मासन व कुक्कुटासन का अभ्यास अच्छी तरह कर लेना चाहिये।

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गर्भासन करने का समय

प्रारम्भ में यह आसन 5 सेकेण्ड और बाद में दो मिनट तक करना चाहिये।

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गर्भासन की सावधानियाँ

गर्भासन करते समय कुछ सावधानिया रखना जरुरी है-

  1. गर्भवती महिला को ये आसन नहीं करना चाहिए।
  2. घुटने के दर्द वालो को भी यह आसन नहीं करनी चाहिए।
  3. कमर दर्द होने इस आसन से बचना चाहिए।
  4. इस आसान को निरंतर अभ्यास से ही सही तरीके से किया जा सकता है।
  5. इस आसन का अभ्यास उन्ही लोगों को करना चाहिए, जो आसानी से पद्मासन कर सकते हैं।
  6. माइग्रेन की स्थिति में, अनिद्रा या निम्न रक्तचाप को इस आसन से बचना चाहिए।

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