ध्वनि योग - Yoga

ध्वनि योग | नाद योग – Yoga

ध्वनि योग ध्वनि का योग है। ध्वनि वह है जो अनुभव की जा सकती है, चाहे जोर से व्यक्त की गई हो या नहीं। ध्वनि मानव को जागरूकता करने के लिए है। जब हम पैदा होते हैं और जब हम मर जाते हैं, तो सुनने के लिए इंद्रियों में से जो गायब होने के लिए पहला और अंतिम है वह है ध्वनि। ध्वनि चेतना के साथ जीवन के तंत्र को अनलॉक करने के लिए एक कुंजी है – ध्वनि योग उस कुंजी को बदल देता है। अपने भीतर उस ध्वनि की महारत हमें अपने अनुभव को आकार देने में सक्षम बनाती है। हम अपने जीवन की रचना करते हैं।

ध्वनि के माध्यम से समाधि बनाए रखना ध्वनि योग है। यह योग आत्मज्ञान के लिए सबसे शक्तिशाली पथ है। यही कारण है कि दुनिया भर में अलग अलग आध्यात्मिक परंपराओं में जब कोई मरता है, तो शास्त्र पढ़े जाते हैं, और पवित्र मंत्रों का जाप किया जाता है। इससे मरने वाले को शांति मिलती है।

नाद(ध्वनि) दो प्रकार की होती हैं आहद और अनाहद। आहद ध्वनि का मतलब होता है दो वस्तुओं के संयोग से या आपस में मिलाने से उत्पन्न ध्वनि और अनाहद का अर्थ जो स्वयं से ही ध्वनित हो। जैसे एक हाथ से बजने वाली ताली है। ताली तो हमेशा दो हाथ से ही बजती है तो उसे तो आहद ध्वनि ही कहेंगे। वैसे नाद कहते हैं ध्वनि को।

स्थिति:

पद्मासन या सिद्धासन लगाकर ज्ञान मुद्रा की स्थिति में बैठें। सिर का पिछला भाग, गर्दन और रीढ़ की हड्डी एक सीध में हों | कोहनियां थोड़ी मुड़ी हुईं आंखें हल्की मुंदी हुई, चेहरे पर प्रसन्नता ।

उष्ट्रासन | Ustrasana Benefits | Yoga Pose

विधि:

पहले कुछ क्षण श्वास को शांतकर स्वाभाविक स्थिति में लाएं। मन व॑ चित्त को एकाग्र करें | लंबा गहरा श्वास भरें | श्वास को सहस्नार चक्र से भर मूलाधार चक्र तक ले जाएं। ओ३म्‌ के उच्चारण को दो भागों में बांटना है। दोनों भागों में लय एक ही रहे । ध्यान को पूर्णतया अपनी ध्वनि पर केंद्रित करें |

अब स्वर में मधुरता लाते हुए आधे भाग में ‘ ओ’ की ध्वनि मूलाधार चक्र से सुषुम्ना नाड़ी में छोड़ते हुए अनाहत चक्र तक काल्पनिक तार बनाते हुए आएं ।

यहां मुख को बंदकर ‘ म्‌” की ध्वनि भ्रमर की तरह करते हुए सहस्रार चक्र तक ले जाकर पूरा श्वास छोड़ दें। इस ध्वनि को अधिक-से-अधिक लंबा करने का अभ्यास करें।

आसनो से दूर करे कमर और पीठ का दर्द

लाभ:

यह नादयोग है, जो मन व नाड़ी संस्थान को शांत करता है । इससे एकाग्रता आता है और सुषम्ना नाड़ी प्रभावित होती हैं। आज्ञा चक्र को जागत करने में नाद योग विशेष रूप से सहायता करता है।

योग क्या है- our health tips

योगासनों का महत्व हमारे जीवन में

About admin

Check Also

वृक्षासन | vrikshasana steps

वृक्षासन | vrikshasana steps

वृक्षासन दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है ‘वृक्ष’ और ‘आसन’ से लिया गया है। …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *