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ध्वनि योग - Yoga

ध्वनि योग – Yoga

स्थिति:

पद्मासन या सिद्धासन लगाकर ज्ञान मुद्रा की स्थिति में बैठें। सिर का पिछला भाग, गर्दन और रीढ़ की हड्डी एक सीध में हों | कोहनियां थोड़ी मुड़ी हुईं आंखें हल्की मुंदी हुई, चेहरे पर प्रसन्नता ।

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विधि:

पहले कुछ क्षण श्वास को शांतकर स्वाभाविक स्थिति में लाएं। मन व॑ चित्त को एकाग्र करें | लंबा गहरा श्वास भरें | श्वास को सहस्नार चक्र से भर मूलाधार चक्र तक ले जाएं। ओ३म्‌ के उच्चारण को दो भागों में बांटना है। दोनों भागों में लय एक ही रहे । ध्यान को पूर्णतया अपनी ध्वनि पर केंद्रित करें |

अब स्वर में मधुरता लाते हुए आधे भाग में ‘ ओ’ की ध्वनि मूलाधार चक्र से सुषुम्ना नाड़ी में छोड़ते हुए अनाहत चक्र तक काल्पनिक तार बनाते हुए आएं ।

यहां मुख को बंदकर ‘ म्‌” की ध्वनि भ्रमर की तरह करते हुए सहस्रार चक्र तक ले जाकर पूरा श्वास छोड़ दें। इस ध्वनि को अधिक-से-अधिक लंबा करने का अभ्यास करें।

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लाभ:

यह नादयोग है, जो मन व नाड़ी संस्थान को शांत करता है । इससे एकाग्रता आता है और सुषम्ना नाड़ी प्रभावित होती हैं। आज्ञा चक्र को जागत करने में नाद योग विशेष रूप से सहायता करता है।

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