जानें आपकी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए-Daily Routine in Hindi

जब तक हम अपनी पूरी दिनचर्या(Daily Routine in Hindi) को व्यवस्थित नहीं करते तब तक आप पूर्णरूप से स्वस्थ नहीं हो सकते। स्वास्थ्य के लिए सभी आवश्यक बातो की और ध्यान देने की आवश्यकता है | अक्सर कई व्यक्तियों को मैंने कहते सुना है कि, में योगासन भी करता हूं, खानपान भी मेरा ठीक है, फिर भी पता नहीं रोग क्यों हो जाता है?” कहीं-न-कहीं, कोई-न-कोई कमी रहने से ही रोग आता है, इसलिए अपने सारे जीवन को सुनियौजित करना आवश्यक है।

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आपकी दिनचर्या(Daily Routine in Hindi) के लिए क्या करे

यदि आप अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते है तो सीधी से बात है आपको अपनी दैनिक दिनचर्या पर फोकस करना होगा है। इसलिए फिट रहने के लिए आपकी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए(Daily Routine in Hindi) ये जरुरी है।

लंबी उम्र और स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है आप अपने daily routine की कुछ बाते ध्यान में रखनी होगी।

नित्यकर्म

रात को जल्दी सोना और प्रातः जल्दी उठना, स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है | जल्दी सोने से नींद अच्छी आती है, मन शांत होता है और विचार शुद्ध होते हैं | मन अशांत है तो करे पद्मासन

सुबह जल्दी उठने से आलस्य नहीं आता। सुबह के सभी कार्य नित्यकर्म, सैर, व्यायाम व शरीर की सफाई भलीप्रकार किये जा सकते हैं । प्रात; उठकर कुल्ला करें, ठंडा पानी पीयें और फिर शौच जाएं। शौच न आए तो भी जाएं ।

प्रतिदिन समय पर शौच जाने से कब्ज न होगी। घर में बच्चों को भी इसी प्रकार की आदत डालें | उठते ही उन्हें शौच भेजें, जिससे पेट साफ हो जाए, यदि किसी कारण से पेट साफ न हो तो एनीमा द्वारा पेट साफ करें । पेट साफ रहेगा, तो शरीर हल्का रहेगा और भूख भी लगेगी।

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दांतों की सफाई

अधिकांश व्यक्ति दांतों को केवल सुबह के समय ही साफ करते हैं और वह भी केवल पेस्ट या ब्रुश से | सुबह तो दांत साफ करने ही चाहिए, रात को भी दांत अवश्य साफ करने चाहिए, क्योंकि भोजन का कुछ अंश यदि दांतों में रह जाएगा तो दांतों को खराब कर देगा।

प्रातः दातुन से और रात को पेस्ट या ब्रुश से दांत साफ करें | ब्रुश को मसूढ़ों के उल्टा नहीं, बल्कि समानांतर चलाएं। रात को नमक-तेल, मंजन या अंगुली से भी मसूढ़ों को रगड़ कर साफ कर सकते हैं।

सर्दियों में गर्म पानी में नमक डालकर अच्छी तरह कुल्ला कर सकते हैं । बच्चों को भी ऐसी आदत डालें कि रात को सोने से पूर्व दांतों को मंजन से अवश्य साफ करें। दांतों को कभी भी आलपिन या सुई से न कुरेदें।

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भोजन तथा अन्य चीजों को अच्छी तरह चबाने से भी दांतों का व्यायाम होता है और दांत मजबूत रहते हैं। कुछ भी खाने के बाद अच्छी तरह से कुल्ला करके दांत साफ कर लें ।

जब कभी दांतों में दर्द हो, दर्द चाहे किसी भी कारण से हो, तो केवल गर्म पानी में थोड़ा नमक डालकर कुल्ला करने, थोड़ी देर नमक वाले पानी को मुंह में रखने से उसे दूर किया जा सकता है। ऐसा कुछ दिन लगातार करना चाहिए। ऐसा प्रतिदिन करते रहने से कभी भी दांतों का रोग नहीं होगा।

रोज कुछ समय निकालकर दांतों को आपस में पूरा जोर लगाकर नीचे दबाएं, कुछ क्षण रुके और फिर उन्हें ढीला छोड़ें । ऐसा 8-40 बार करें। यह क्रिया सैर करते समय या शौच पर बैठते समय कर सकते हैं। ऐसा करने से दांत जल्दी नहीं गिरेंगे और दांतों के रोग भी नहीं होंगे।

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स्नान

प्रतिदिन ताजे पानी से स्नान करना भी स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। त्वचा हर समय शरीर के अंदर के विकार को बाहर निकालती है। उस मैल को स्नान करके ही साफ कर सकते हैं और चमड़ी को निरोग बना सकते हैं।

स्नान करना भी एक कला है। केवल कुछ लोटे पानी शरीर पर डाल लेने से स्नान नहीं हो जाता । स्नान अच्छी तरह शरीर को रगड़-रगड़ कर करना चाहिए।

स्नान करने से पहले सारे शरीर को हाथों से हल्के-हल्के राड़ें। शरीर को थोड़ा गरम करें, फिर स्नान करें। साबुन का प्रयोग सप्ताह में एक बार से अधिक न करें। स्नान के बाद तौलिए से अच्छी तरह शरीर को पोंछकर सुखा लें।

कई व्यक्ति गीले बदन ही कपड़े पहन लेते हैं, वह ठीक नहीं है। अच्छा हो, थोड़ी देर शरीर को धूप में सुखा लें। स्नान करने से 5/20 मिनट पहले से शरीर को धूप में गरम करके यदि स्नान करें तो बहुत लाभ होगा।

स्नान ताजे पानी से ही करना चाहिए। गरम पानी से स्नान करने से शरीर खुलता नहीं है और चमड़ा भी दुर्बल होता है । सर्दियों में यदि गरम पानी व्यवहार में लाना हो तो बहुत कम गरम पानी लें | शरीर तो पहले से ही गरम रहता है, उसे तो ठंडे व ताजे पानी से स्नान देने में लाभ है। हां, अत्यंत ठंडा पानी नहीं होना चाहिए।

ताजे और साधारण ठंडे पानी से स्नान करने से रक्त का संचार अच्छी तरह होगा, रक्त की शुद्धि होगी और शरीर में स्फूर्ति व ताजगी आएगी | सर्दियों में यदि गरम पानी से स्नान करना हो, तो पहले गरम से स्नान के बाद कुछ लोटे बिलकुल ताजे पानी के डालकर सामान्य स्थिति ले आनी चाहिए। ऐसा करने से कभी सर्दी नहीं लगेगी, सरद-गरम से बचाव रहेगा।

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कपड़े

सभ्य समाज में कपड़ों का पहनना अत्यंत आवश्यक है। कपड़े शरीर पर खुले हों, ताकि शरीर को ताजी हवा लगती रहे । तंग कपड़ों से शरीर को, अपने को स्वस्थ रखने के काम में बाधा पड़ती है । सफेद कपड़े शरीर के लिए सबसे अच्छे रहते हैं ।

गर्मी के दिनों में मोटा कपड़ा पहनें, ताकि लू से बचा जा सके | बरसात में पतले व कम-से-कम कपड़े पहनें ताकि ठंडी हवा शरीर को मिले । सर्दियों में आवश्यकतानुसार कपड़े पहनें ताकि शरीर की गर्मी को अंदर ही समेटा जा सके |

नायलोन के कपड़े त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं, विशेषकर त्वचा से लगने वाला कोई भी कपड़ा, बनियान आदि नायलोन की नहीं पहनना चाहिए | कमीज यदि पोलियस्टर या नायलोन की पहनें भी तो उसके नीचे सूती बनियान जरूर होनी चाहिए।

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निद्रा

अच्छी नींद आना स्वास्थ्य की निशानी है | यह हमारी मूल आवश्यकताओं में से एक है। ठीक नींद न आने से अनेक जटिल रोगों का जन्म होता है।नींद पूरी नहीं लेने की वजह से हो सकता है नुकसान ‘ अनिद्रा” अपने-आप में ही एक रोग है।

निद्रा में शरीर अपनी टूट-फूट की मरम्मत करता है, विकारों को बाहर निकालकर अपने को स्वस्थ करता है और दूसरे दिन फिर से काम करने की शक्ति प्राप्त करता है। रात में देर तक काम करना और शरीर को आवश्यक आराम न देना या रात क्लबों और सिनेमाओं में बिताना अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना है।

चार-पांच वर्ष तक बच्चों को अधिक-से-अधिक समय सोने देना चाहिए। युवा व्यक्ति को आठ घंटे अवश्य नींद लेनी चाहिए। पचास वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को 6 घंटे सोना पर्याप्त है। वैसे 4 घंटे की गहरी नींद अगर आ जाए तो उससे भी काम चल सकता है। गहरी नींद पर ही शरीर का स्वास्थ्य निर्भर करता है।

नींद संबंधी विकार और लक्षण क्या है?

अच्छी और गहरी नींद के लिए निम्नलिखित बातों की ओर ध्यान दें:-

सोने का स्थान स्वच्छ व हवादार हो। खिड़की, रोशनदान आदि खुले हों । ताजी हवा आती-जाती रहे। ‘

बिछौना साफ-सुथरा और आरामदेह हो। सर्दियों में ऊपर ओढ़ने का कपड़ा भी पर्याप्त हो, जिससे आप शिथिल होकर सो सकें | शरीर को ढीला रखकर सोने से सुबह उठने पर शरीर में नयी शक्ति का अनुभव होता है।

चारपाई कसी हुई होनी चाहिए | अच्छा हो यदि आप तख्तपोश पर सोएं इससे आपका मेरुदंड सीधा रहगा और रक्त का संचार सारे शरीर में बेरोकटोक होगा।

मुख को कपड़े या लिहाफ से ढंककर नहीं सोना चाहिए । श्वास नाक से लें और नाक से ही छोड़ें ताकि वह गरम होकर व छनकर अंदर जाए। मुख से सांस लेना और छोड़ना बहुत बुरी आदत है, इससे बचें।

रात सोते समय पेट हल्का रहना चाहिए पांव यदि ठंडे रहते हों तो उन्हें गरम पानी में रखकर गरम कर लें।

जब आप सोने जाएं तो मन शांत और चिंताओं से मुक्त होना चाहिए। निद्रा से पूर्व यदि कुछ मनोरंजन हो जाए तो शरीर की नस-नाड़ियां व मांसपेशियां शिथिल हो जाएंगी और नींद अच्छी आएगी।

जिन्हें नींद न आती हो, वे सोने से पूर्व 70-5 मिनट लंबी गहरी सांसें लें ।इससे नींद बहुत अच्छी आएगी।

रात को सोने से पूर्व हाथ-मुंह धोकर आंखों पर छींटे लगाएं। बज्र आसन में बैठकर अपने इष्टदेव का ध्यान करें, मंत्र का जाप करें, प्रार्थना करें और फिर सो जाएं। इससे गहरी नींद आएगी।

सोने से पूर्व आंखों के चारों ओर मालिश करके आंखों की मांसपेशियों को शिथिल कर लें । कभी-कभी हल्की सिर की मालिश करवाएं, ताकि मस्तिष्क की नाड़ियां शिथिल हो जाएं।

सोते हुए एक गिलास ठंडा पानी पीने से नींद अच्छी आती है। सोने से पूर्व पेशाब करके सोएं। कपड़े कम-से-कम और ढीले पहनकर सोएं | तकिया न बहुत ऊंचा हो, न ही ज्यादा नीचा।

सोते समय किन बातों का रखे ध्यान!

व्यवहार

अपनी बोलचाल में मिठास लाएं मीठा बोलने से हम जहां दूसरे का मन जीतते हैं, वहीं अपने को आनंदित भी करते हैं| हमारा व्यवहार शुद्ध और दूसरों की सेवा-भावना से युक्त होना चाहिए |

दूसरों की सेवा करने से ईश्वर के दर्शन होते हैं | समाज में जो विषमता और अशांति है, उसका एक मुख्य कारण है अपने स्वार्थ की सिद्धि पर जोर और परमार्थ का अभाव। आप यदि वास्तव में सुख चाहते हैं और प्रभु के दर्शन करना चाहते हैं, तो नि:स्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा करने की भावना अपने में पैदा करें।

मानता हूँ ये दिनचर्या(Daily Routine in Hindi ) को अपनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। फिर भी आप अगर आप अपने आलस्य से थोड़ा लगे तो आप इस अपना सकते है। में तो ये कहूंगा जिस दिन भी ये लेख पड़े ुशी दिन से इसे अपनाना स्टार्ट करदे।

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