भुजंगासन | Bhujangasana in Hindi

भुजंगासन(Bhujangasana in Hindi) पीछे की और झुकने वाला आसन है जिसे हठ योग के हिस्से के रूप में अभ्यास किया जाता है। भुजंगासन नाम संस्कृत के शब्द भुजंगा से लिया गया है जिसका अर्थ है सांप या कोबरा और आसन का अर्थ मुद्रा है। भुजंगासन में एक साथ सिर और धड़ उठाये हुए एक कोबरा जैसा दिखता है। इसलिए इसे कोबरा आसन भी कहा जाता है।

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यह सूर्य नमस्कार आसन में इसे एक चक्र के रूप में किया जाता है। जहां यह 12 आसनो की श्रृंखला में 8 वें आसन के रूप में किया जाता है। हमारे दिन-प्रतिदिन के कार्यों में मुख्य रूप से हमारी पीठ की मांसपेशियों को अधिक व्यायाम नहीं मिलता है, । इन मांसपेशियों के कमजोर होने से पीठ में दर्द, अकड़न, स्लिप्ड डिस्क और आदि समस्या हो सकती हैं। भुजंगासन पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है।

इसको पेट के बल लेटकर किया जाता है। भुजंगासन में शरीर की स्थति पहन उठाये भुजंग की तरह हो जाती है। इसलिए इसे सर्पासन भी कहा जाता है। खुद को फिट रखने के लिए ये आसन बहुत अधिक लाभदायक है।

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भुजंगासन की विधि- Bhujangasana Steps in hindi

भुजंगासन की विधि

पेट के बल लेट जाएं । पांव बाहर की ओर खिंचे हुए, एड़ियां-पंजे मिले हुए, माथा पृथ्वी पर। हाथ की हथेलियों को कंधों के बराबर स्थिर करें | कोहनियां भूमि पर और शरीर के साथ सटी हुईं। गर्दन को ऊपर उठाकर पीछे की ओर मोड़ें।

शरीर के दो भाग करें, पेट एवं निचले भाग को नीचे की ओर, और आगे वाले भाग को श्वास भरते हुए धीरे-धीरे नाभि तक इस स्थिति में उठाएं कि कोहनियां ज़मीन से थोड़ी ही उठें।

कुछ क्षण इस स्थिति में रुकें, फिर श्वास छोड़ते हुए वापिस आ जाएं। बायां कान जमीन पर लगाते हुए शरीर को शिथिलासन में ढीला छोड़ दें। ध्यान विशुद्धि -चक्र पर।

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भुजंगासन से पहले करने वाले आसन

इस आसन को करने से पहले ये आसन कर सकते है-

बालासन (Balasana)
गरुडासन (Garudasana)
मार्जरी आसन (Marjariasana)

भुजंगासन के बाद वाले आसन

बितिलासन (Bitiliasana)
ऊर्ध्व मुख श्वानासन (Urdhva Mukha Svanasana)
सेतुबंधासन (Setu Bandahasana )

भुजंगासन के लाभ- Bhujangasana Benefits in Hindi

  • इस आसन से गुर्दों को विशेष रूप से लाभ मिलता है। गर्दन, कंधे, मेरुदंड प्रभावित होते हैं ।
  • टोंसिल व गले की ग्रंथियों को बल मिलता है, जिससे शरीर में यौवन-पूर्ण लचक पैदा होती है ।
  • पीठ, छाती, हृदय, कंधे, गर्दन व पेशियां शक्तिशाली बनती हैं। हृदय रोग में विशेष-तौर पर लाभ देता है ।
  • सवाईकल के रोगों के लिए रामवाण है । एड्रीनल ग्रंथि प्रभावित होती है।
  • यह नितंब की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
  • भुजंगासन मासिक धर्म की अनियमितताओं को ठीक करने में मदद करता है।
  • अस्थमा तथा अन्य स्वांस से संबंधी बीमारियों में यह बहुत लाभदायक। ( ध्यान दे जब अस्थमा का दौर जारी हो तब इस आसन का प्रयोग नहीं करें)। अस्थमा (दमा रोग) के लक्षण कारण और इससे बचाव के उपाय है।
  • इस आसन से पेट के अंग अच्छे से काम करते है।
  • ये थकान को मिटा कर शरीर में स्फूर्ति लता है।
  • जो लोग काम की वजह से तनाव में अधिक रहते है उनके के लिए आसन लाभकारी है। ये तनाव मुक्त करता है और मन को शांत करता है।
  • ये पेट की चर्बी को भी काम करने में मदद करता है। जिनको पेट निकला हुआ उन्हें ये आस्सन करने की सलाह दी जाती है।

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भुजंगासन में सावधानी | Bhujangasana Precautions in Hindi

योग के किसी भी आसान को अपनी क्षमता के अनुरूप ही करना उचित रहता है। इस आसन की भी कुछ सावधानिया है जिन्हे ध्यान में रखकर ही आसान का उपयोग करे।

  • यदि आप गर्भवती हैं या यदि आपको हाल ही में पेट की कोई सर्जरी हुई है तो आपको इस आसन से बचना चाहिए।
  • अगर आपको रीढ़ या कूल्हे में कोई चोट है तो भुजंगासन से बचना चाहिए।
  • यदि आप लंबे समय से बीमार चल रहे है या फिर रीढ़ की हड्डी की बीमारी से ग्रसित रह चुके है तो, भुजंगासन का अभ्यास किसी अच्छे प्रशिक्षक की निगरानी में ही करें।
  • इस आसन अभ्यास के समय पेट दर्द या शरीर के अन्य भाग में दर्द होने पर आसन छोड़ दे।
  • आसन करते समय ध्यान रखे पीछे की और अधिक नहीं झुकें। ऐसा करने से माँस-‍पेशियों में खिंचाव हो जाता है इसके कारण बाहों और कंधो में दर्द हो सकता है।

भुजंगासन करने का समय | Time Duration Of Bhujangasana

ये जानना भी बहुत आवश्यक है की इस भुजंगासन को कितने समय और कितनी बार करना चाहिए। जो लोग इस आसन की शुरुआत ही कर रहे है उन्हें तीन बार करना चाहिए। हम कह सकते है की इस आसन का 20 से 30 सेकंड का एक सेट होता है और ऐसे आपको तीन सेट करने है। अभ्यास होने पर इसकी संख्या धीरे धीरे आप 21 तक बढ़ा सकते है।

आपको बता दे की इस आसन मुद्रा में 20 से 30 सेकंड से अधिक नहीं रुकना चाहिए। वापस अपने सामान्य पोज़ में आना चाहिए, लेकिन समयावधि अभ्यास होने के बाद बढ़ा सकते है।

भुजंगासन का वैज्ञानिक कारण | Scieance Behind The Bhujangasana

ये आसन योग विज्ञानं के हिसाब से भी सभी अलग आसनो में एक बताया गया है। इसके बहुत अधिक फायदे होने के कारण ये आसन अलग माना गया है। पहले वाले टॉपिक भुजंगासन के लाभ में इसके लाभ भी बताये गए है।

इसके साथ ही यह आसन हमारे 7 चक्रो में से 4 चक्र विशुद्धि चक्र, अनाहत चक्र, मणिपूर चक्र और स्वाधिष्ठान चक्र को खोलने में महत्वपूर्ण मदद करता है। इसके साथ ही इस आसन को करते समय आँखों खुली रखने पर आँखों की समस्या भी(आंखों की नर्व्स और नेत्र ज्योति ) भी ठीक होती है।

Beginner tips

यदि आप इस आसन के लिए नए है तो शुरुआत में इस आसन को पूरा नहीं करके अभ्यास के साथ कोशिश करे। क्योंकि ऐसा करने से कमर और गर्दन में दर्द हो सकता है।

आसन करते समय आगे के भाग को अपनी क्षमता के अनुरूप ही उठाये। जब कमर और गर्दन में दर्द होने लगे तो इसका अभ्यास छोड़ कर आराम करे।

भुजंगासन योग अभ्यास हमेशा सुबह खाली पेट ही करना चाहिए। अगर आप सुबह इस आसन को नहीं कर पा रहे तो शाम को भी कर सकते है। लेकिन भोजन और आसन को करने में 4-से 6 घंटे का समयांतराल होना चाहिए।

निष्कर्ष | Conclusion

हम जानते है की योग करने से हमारे मन और शरीर दोनों के लिए बहुत लाभदायक है। यदि आपको कोई बीमारी है और आप उसको आसन से ठीक करने चाहते है तो आसन को किसी योग प्रशिक्षक की नजर में करना ही सही होगा।

भुजंगासन(Bhujangasana in Hindi) को अपने अभ्यास में अपनाकर इसके सभी लाभ का फयदा ले सकते हो, लेकिन फिर शुरुआती व्यक्ति को किसी योग शिक्षक के निर्देश में करना उचित होगा।

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