अर्ध चक्रासन योग विधि, लाभ और सावधानी

यह आसन चक्रासन की तुलना में बहुत आसान है। बहुत से लोगों को चक्रासन का अभ्यास करना मुश्किल लगता है, तो वे लोग इस आसन को कर सकते है।

आइए देखें, ” अर्ध चक्रासन लाभ ” और अर्ध चक्रासन योग करते समय आपको कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए  यह आसन अत्यंत लाभकारी है क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है और पीठ दर्द की समस्या को कम करता है और पेट की चर्बी को जलाने में भी मदद करता है। 

अर्ध चक्रासन विधि | Ardha Chakrasana Steps

नोट-इस आसन की दो विधियां हैं।

अर्ध चक्रासन विधि क्या है? | What is Ardha Chakrasana?

इसमें शरीर को अर्ध चक्रासन मुद्रा में लाते हैं, इसलिए यह अर्ध चक्रासन(Ardha Chakrasana) कहलाता है।

ये भी पढ़े:- वातायनासन की विधि और लाभ

अर्ध चक्रासन के लाभ | Ardha Chakrasana Benefits

  • इस आसन से शरीर में चुस्ती तथा फुर्ती आती है। आलस्य नष्ट होता है।
  • मांसपेशियां सशक्त एवं सजीव बनती हैं। नस-नाड़ियां पुष्ट होती हैं। टांगो तथा बांहों की हड्डियां मजबूत होती हैं। छाती का विस्तार बढ़ता है।
  • इस आसन से मेरूदण्ड लचीला बनता है और सिरदर्द, कमर दर्द आदि दूर होते हैं। यह उदासी तथा थकान को दूर कर काम में मन लगाता है तथा चित्त को प्रफुल्लित बनाए रखता है।

ये भी पढ़े:- सूर्य नमस्कार की विधि और बारह अवस्थायें (चरण)

अर्ध चक्रासन विधि-1 | Ardha Chakrasana Steps-1

ardha chakrasana step 1

खड़े होकर दोनों हाथों की मुट्ठिया बांध लें फिर उन्हें ऊपर की ओर उठाएं। इसके साथ ही कमर के ऊपरी भाग को नीचे लाएं। टांगें सीधी रहनी चाहिएं। नाक से दायें घुटने को छूने का प्रयास करें। फिर आसन से पूर्व स्थिति में आ जाएं।

ये भी पढ़े:- चक्रासन कैसे करे | chakrasana in Hindi | Benefits

अर्ध चक्रासन विधि-2 | Ardha Chakrasana Steps-2

ardha chakrasana step 2

सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पांवों में आगे की ओर डेढ़ फुट का और पीछे की ओर एड़ियों में एक फुट का अन्तर रहें। अब दोनों बांहों को एक साथ ऊपर ले जाएं और उनके पंजों को परस्पर जकड़ लें। फिर कमर॑ से ऊपर थोड़ा-सा शरीर का भाग पीछे की ओर झुककार आकाश की ओर देखें। उक्त स्थिति में एक-दो मिनट तक रहें। इस आसन को पांच से सात बार तक दोहरायें।

ये भी पढ़े:- कपालभाती प्राणायाम के चमत्कारी फायदे

अर्ध चक्रासन की सावधानी | Ardha Chakrasana Precautions

  1. इस आसन में कमर पर सबसे ज्यादा जोर पड़ता है, इसलिए आसानी के साथ आसन मुद्रा अपनाएं।
  2. यदि आप गर्भवती हैं तो पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करना और फिर इस आसन को करना महत्वपूर्ण है। 
  3. जो लोग गंभीर रीढ़ या कूल्हों की समस्या या चोट से उभर रहे हैं उन्हें इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  4. हर्निया और अल्सर की समस्या वाले लोगों को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  5. जिन लोगों को उच्च रक्तचाप है, उन्हें भी इस आसन से बचना चाहिए।

अर्ध चक्रासन विधि-1 व 2 करने का समय

दोनों विधि के आसनों में एक से दो मिनट तक रहें। आसनों को पांच से सात बार तक करें।

ये भी पढ़े:- उष्ट्रासन | Ustrasana Benefits in Hindi

अर्ध चक्रासन से जुड़े हुए तथ्य

  • यह आसन ललाट और पेट के खिंचाव के लिए जाना जाता है।
  • जब आप अर्ध चक्रासन कर रहे हों तो कोहनी के बीच के अंतर को कम करने की कोशिश करें। यह आपको अधिक ऑक्सीजन और साँस लेने में मदद करेगा।
  • यह आसन आपके ऊपरी धड़ के लिए अच्छा है।
  • यदि आप चक्कर से पीड़ित हैं तो आपको अर्ध चक्रासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए । यदि आप दैनिक रूप से अर्ध चक्रासन का अभ्यास करते हैं तो आप बहुत से पोस्टुरल दोषों को दूर कर सकते हैं।
  • यदि आपको कोई हृदय संबंधी समस्या है तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।

हमे उम्मीद है की आपको ये आर्टिकल उपयोगी और अच्छा लगा होगा। आप इस ब्लॉग और “अर्ध चक्रासन विधि और लाभ” को अपने परिवार वालो और मित्रो के साथ साझा जरूर करे। साथ ही हमे कमैंट्स करके जरूर बताये।

ये भी पढ़े

तुलासन योग विधि, लाभ और सावधानी

सुप्त वज्रासन कैसे करे, विधि और लाभ

Add Comment