भ्रूणासन करने की विधि और लाभ

आसन करने की विधि :-

पीठ के बल सीधे लेट जाये। फिर दोनों पैरो को धीरे धीरे उठाकर सिर की और ले जाइये। सिर से निचे ऐड़ियो को तकियो के समान लगाइये।

इस क्रिया में पैरो की कैंची जैसी बन जाती है। अब दोनों हाथो को जांघो के बाहर की और से लाकर और नितम्बो को निचे लगाकर थोड़ा ऊपर उठाने की कोशिश कीजिये तथा अंगुलियों को आपस में गूँथ लीजिये।

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रोग निदान और लाभ:-

  • इस आसन के अभ्यास होने के बाद कुंडली जाग्रत होती है।

 

  • शरीर लचीला और सुन्दर बनता है और साथ में मन को अपर सुख प्राप्त होता है।

 

  • युवाओ के लिए आसान श्रेष्ठ है, किन्तु महिलाओ के लिए ये आसान कभी भी नहीं करना चाहिए।

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